लाल मोर
लाल मोर राजा कृष्णदेव राय अद्भुत और दुर्लभ वस्तुएं संग्रहित करने के शौक़ीन थे. ऐसी वस्तुएं लाने वाले व्यक्ति को वे उचित पुरुस्कार दिया करते थे. इसलिए उनके दरबारी पुरुस्कार की आशा और महाराज की नज़र में चढ़ने के लिए विभिन्न प्रकार की दुर्लभ वस्तुओं की ख़ोज में रहते थे. इसी क्रम में एक दिन उनका एक दरबारी अपने साथ लाल रंग का एक मोर लेकर दरबार में उपस्थित हुआ. जब उसने वह मोर महाराज को भेंट स्वरुप प्रस्तुत किया, तो महाराज के आश्चर्य की कोई सीमा न रही. सारे दरबारी भी चकित थे, क्योंकि ऐसा अनोखा मोर कभी किसी ने नहीं देखा था. महाराज ने उस दरबारी से पूछा, “तुम्हें यह अनोखा मोर कहाँ से मिला?” दरबारी ने बताया, “महाराज! मैं आपके लिए एक दुर्लभ भेंट की ख़ोज में था. इसलिए पूरे देश में मैंने सेवक भेजे. मध्यप्रदेश के घने जंगलों में ये लाल मोर पाए जाते हैं. जब सेवक ने मुझे प्रकृति की इस सुंदर और अद्भुत रचना के बारे में सूचित किया, तो मुझे आपके लिये ये सर्वोत्तम भेंट प्रतीत हुई और २०० स्वर्ण मुद्राओं में मैंने ये लाल मोर ख़रीद लिया.” महाराज ने कोषाध्यक्ष से कहकर दो सौ स्...